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Friday, July 15, 2016

काश! यादों की भी, कोई तो उम्र होती

तन्हाइयाँ क्यूँ  रहे दहशत में हर पल इनकी
काश! इनके लिए भी,
कोई तो कैद.... कोई कब्र होती...
(by: Krishna Kumar Vyas)