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Friday, July 1, 2011

एक आम इन्सान का सफर


आओ चलो करें तय..
एक आम इंसान का सफ़र..

जब जब घर से निकलता..
माथे पर तिलक या बाजुओं में फकीर के तावीज़ में
माँ के भरोसे का संग संग चलता..असर |
ऐसे एक आम इंसान का सफ़र.

सड़कों से सॅटी दीवारों पर चिपके फिल्मी पोस्टरों के नायक में खुद को ढूंढता.
कानो को भाए नुक्कड़ पर गूँजता रेडीओ का मध्यम स्वर...
दुनिया को अपने पेरो से पीछे छोड़ने का कर के प्रण
हर दिन चल पड़ता है जो..
मिटाने किस्मत मे लिखी विवस्ता के कहर का असर ...
ऐसे एक आम इंसान का सफ़र..

आओ चलो करें तय..एक आम इंसान का सफ़र..

घर मे बचों की भीड़ .. तो बाहर लोगों की...
तन्हाइयों में भी जिसे चैन मिलता ऩही 
की घेरे रहती है यहाँ भी तो..
चिंता...
रोटी कपड़े और मकान की...
ऐसे एक आम इंसान का सफ़र.
बच्चों की मासूम ख्वाईसैं हों या फिर .. बीवी के खाली हाथ
गाँव से आई पिता की मजबूरियों की चिट्ठी
कर दे पूरी ये भी हर आस जो भी है अधूरी .. 
आसू बिक सकते बाजार मे काश ! जो इसके भी अगर..
हाँ यही है एक आम इंसान का सफ़र...

आओ चलो करें तय..एक आम इंसान का सफ़र..

ऐसा नही की ..
नही तड़प उठता है, इसका दिल भी
जब जब सुने...
भरस्टचार के किस्से...
बेआबरू होती माँ - बहनो की बाते..
खोलता है खून इसका भी
हुंकार भर ले ये भी
मगर...

अपने, अपनों की सलामती की चाह में..
घुट गयी है .. दब गयी है..
ये क्रांति वाली हलक...

सामाजिक मुद्दे उठाते अख़बारों को समेटे
रद्दी वालों से करता मोल भाव...
ऐसे आम इंसान का सफ़र..

थक कर मौत में सहारा ढून्डता..
पर अगले ही पल..
जिंदगी के लिए दौड़ना पड़ता है जिसे चारो पहर..

आओ चलो करें तय..एक आम इंसान का सफ़र..
By - Krishna Kumar Vyas
May 16, 2010

Wednesday, June 29, 2011

किसी और को "ख़ुदा" भी तो हम कहते नहीं

कभी वो हमारे कंधो को अपना घर कह्तेथे,
दिल में धडकनों की जगह,
हम से वो जिन्दा रहते थे।

अब बेरुखी
बढ़ गयी हे इतनी के,
पास से गुजर जाते हैं मगर,
एक पल भी नजरों से तक,
दुआ सलाम करते नहीं।

हम अब सिकायत करैं भी तो
किस से करैं??!

के उनके सिवा किसी और को
"ख़ुदा" भी तो हम कहते नहीं.

kabhi wo hamare kandho ko apna ghar kehtethe,
dil main dhdkano ki jagah,
hum se wo jinda rehte the,

ab berukhi
itni badh gayi hey ke,
paas se gujar jate hain magar,

ek pal bhi najron
se tak dua salam karte
nahi

Hum ab sikayat bhi karain to kis se karain...
ke unke siwa kisi or ko,
"Khuda" bhi to hum kehte nahi.

Tuesday, June 28, 2011

ab to hinglish ka jamana hey

ab to hinglish ka jamana hey,

sirf hindi bolo to ubau lagti hey
bina pahiye ki belgadi lagti hey

sirf english bolo to
tabiyan hekdi baaj si lagti hey
or kabhi kabhi jeb pe bhari padti hey
ab to hinglish ka jamana hey

college me jakar azadi mehsus hoti hey,
ladkiyon se nigahain chaar hoti hain..
padhai to bas ek bahana hey,

science, sanskrit ke chakar me agar fas gaye,
to ladkiyan haath se nikal jaingi,
arey reputation bhi koi chiz hey
Kitabon ke chakar me sar pe tat pad jaigi.

rahi baat bhaviysa ki
to MBA kahin se bhi kar lainge
Paison ki chinta maa baap ko karne do
aakhir baap ke kaale dhan ko kahin na kahin to khapana hey...
ab to hinglish ka jamana हे

by- Krishna kumar vyas