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Sunday, September 4, 2011

बेख़ोफ़...आ, और कत्ल कर दे... तू ही मेरा...

बेख़ोफ़...आ, और कत्ल कर दे...
तू ही मेरा...

पर इरतज़ा है...
बेख़ोफ़ ...आ
और वार कर सीने पर...
बेवफा तो तू है मगर ..
कोई ये ना सोचे
के महबूब मेरा बुजदील भी था...

तू परेशान ना हो..हेरान भी ना हो
शायद,
साज़िश ये खुदा की ही होगी...
मेरे क़ाफ़िर पन की भी यही वाजिब सज़ा होगी

जिसके लिए भुला हूँ खुदा को...
खंजर हाथों मे है उसी के
पर इस से खूबसूरत
मौत भी तो और क्या होगी!!
बेख़ोफ़ ...आ
और कत्ल कर दे तू ही मेरा..
पर इरतज़ा है,
आँखों से आँख मिला,
गुमान ही सही ... फ़िर भी शुकून तो होगा
आखरी साँस तक तेरी आखों मे बस मैं ही था...

Friday, September 2, 2011

तो मुझ पर गुनहगार की तोहमत क्यों है!!

जब हर पल लिखा है उसने...जब दुनिया का हर शक्स चुना है उसने
हर किसी की जब तकदीर का मालिक वही है..
तो मुझ पर गुनहगार की तोहमत क्यों है!!
मेरे हिस्से मे गुनाह क्यों है.!!

चाहे मिले जन्नत या जहनुम्म ही सही
कायनात उसी की..खेल उसी का..
तो फिर फ़ैसला??

पनाह मे जाकर उसकी जब वही करेगा फ़ैसला...
तो फिर इस दुनिया मे हिसाब किताब क्यों है!!
फिर सही - ग़लत कहने वाले ...
इस जहाँ मे
ये खुदा के...खुदा क्यों है..!!
मुझ पर गुनहगार की तोहमत क्यों है.!
By: Krishna Kumar Vyas
(kuch adhure Panno se)

Sunday, August 28, 2011

शायर का क्या है....

शायर का क्या है....
नज़ूक दिल है...
परवाह ना करना...
टूट जाए ...या फिर खुशी मिले कोई...
शायर का दिल है,
आँखे छलक ही आती हैं|

कौन समझा है जो अब समझ जायगा,
दिल रोता है तो रोने दे...खुद ही बहल जायगा
शायर का दिल है...
गुबार गर बढ़ भी गया...तो फ़िक्र ना कर,
अल्फ़ाज़ बन किताबों पर उतर आएगा|
शायर का दिल है|